धर्मजयगढ़-: तहसील धर्मजयगढ़ के भू भाग पर कोयला भंडार होना और उसे उत्खनन का दोहन करने की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। पूर्व में s.e.c.l के द्वारा छाल एरिया व कुड़ुमकेला एरिया में कई खदान संचालित है। अब धर्मजयगढ़ नगरीय क्षेत्र से लग कर तथा आस पास कई खदान संचालित होना है। जिसके प्रत्येक गांव का भूमि का बाजार मूल्य अलग अलग है प्रभावित किसान इन बाजार मूल्यों की विशेगति/ कम होने पर भारी आक्रोश है। जिसका निर्धारण

भूमि अर्जन पुर्नवासन और पुर्नव्यस्थापन अधिनियम 2013 में धारा 26 में कलेक्टर द्वारा भूमि के बाजार मूल्य निर्धारण करने नियमों के तहत अधिकार दे रखा है। धारा 24 कतिपय मामलो में 1894 (1) अधिनियम के अधीन भूमि अर्जन प्रक्रिया में भूमि अर्जन अधिनियम की धारा 11 के अधीन कोई अधिनियम नहीं किया गया। वह प्रतिकार की अवधारणा किए जाने से संबंधित सभी उपलब्ध लागू होंगे तथा वहां धारा 11 के अधीन अधिनिर्णय किया गया है जो अर्जन के मामले में पूर्ववर्त रहेगी। तथा भूमि अर्जन अधिनियम 1894 के अधीन आरम्भ की गई अर्जन की कार्यवाहियों के किसी मामले में धारा 11 के अधीन इस अधिनियम के प्रारंभ की तारीख के पांच वर्ष के बराबर या उससे अधिक पूर्व अधिनिर्णय किया गया है। किंतु भूमि का भौतिक कब्जा नहीं लिया है जो कार्यवाही के बारे में वह व्यापगत हो गई है। और समुचित सरकार के निर्णयानुसार अधिनियम के उपवर्धा के अनुरूप भूमि अर्जन की कार्यवाहियों नए सिरे से प्रारंभ करेगी। धारा 26 के अनुसार कलेक्टर महोदय द्वारा भूमि का बाजार मूल्य का निर्धारण करने निम्न आपदंड आपनएगा जैसे उस क्षेत्र जहां भूमि है यथास्थिति क्रय ,विक्रय के करार के रजिस्टीकरण के लिए भारतीय स्टाम्प अधिनियम 1899 (1899 का 2) विनिदिवर बाजार मूल्य यदि कोई हो तो (20) निकटवर्ती ग्राम या निकटवर्ती पड़ोसी क्षेत्र में स्थित उसी प्रवार की भूमि के लिए औसत विक्रय मूल्य या प्राइवेट कंपनियों के लिए भूमि अर्जन के मामले में धारा 2 की 34 धारा (2) के अधीन कराए पाए गए प्रतिकर की सम्मत धनराशि जो भी अधिक हो। परंतु बाजार मूल्य की अवधारणा धारा 11 के अधीन अधिसूचना जारी की गई है । स्पष्टीकरण में खंड (24) में निर्दिष्ट औसत विक्रय कीमत उस वर्ष के नियमों भूमि का ऐसा अर्जन किया जाना प्रस्तावित है ठीक पूर्ववर्ती तीन व के दौरान निकटवर्ती ग्राम या निकटवर्तीय समीप क्षेत्र में उसी प्रकार क्षेत्र के लिए राष्ट्रीकृत क्रम विक्रय के करार को ध्यान में रखकर अवधारित की जावेगी सरकार द्वारा आपसी सहमति से भूमि क्रय निति 2016 के अनुसार निर्धारित प्रतिफल के अतिरिक्त भू स्वामी को इतनी राशि का भुक्तान की जावेगी। पड़त भूमि 6 लाख अनसेंचित 8 लाख तथा सिंचित भूमि (दो फसली) के लिए 10 लाख रुपया न्यूनतम निर्धारित की गई है । राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग क्र.f.7.4 / सात _1 / 2015 (पार्ट) दिनांक 25/11 /2019 द्वारा प्रतिस्थापित। (छ ग) राजपत्र दिनांक 5/12/ 2019 को पृष्ठ 1659 पर प्रकाशित प्रतिस्थापन के पूर्व उपकंडिका 5 निम्नानुसार था _ उपरोक्त के अतिरिकत प्रतिफल के समतुल्य राशि विक्रेता को एकमुश्त तोषण के रूप में दी जाएगी । इस प्रकार निजी भूमि और उस पर स्थित स्थावर परिसंपत्रियों के लिए नगर क्षेत्र में विक्रेता को x2 गुणा राशि एवं ग्रामीण क्षेत्र को x4 राशि प्राप्त होगी । S.e.c.l द्वारा दुर्गापुर।। कोल ब्लॉक की धारा 11 (1) फरवरी 2016 में प्रकाशित हुई है । नियमों के तहत 5 वर्ष के अधिक समय के उपरांत भी स्थानों को भूमि का प्रतिकर प्राप्त नहीं हुआ। अत: जिलाध्यक्ष महोदय परियोजना को निरस्त करने या वर्तमान बाजार मूल्य के हिसाब से भूमि क्रय करने व प्रतिफल निर्धारित कर सकता है तथा उक्त परियोजना मे पूर्णवास द्वारा पदत्त किसानों की भूमि 70% अधिग्रहण होना है। तथा रजिस्टीकरण अभिलेख में क्रय विक्रय नहीं होने पर बाजार मूल्य सामान्य रूप से है तथा पड़ोसी ग्राम/ समीप ग्राम/ निकटवर्ती ग्राम तरईमार में क्रय, विक्रय हुआ है । नियमानुसार धारा 26 के अधीन निकटवर्ती पड़ोसी क्षेत्र में स्थित सेम परियोजना व सेम (एकरूप) भूमि के लिए औसत विक्रय दर श्रीमान जिला कलेक्टर द्वारा निर्धारित किया जा सकता है। यह प्रतिकर किसानों की दी जाने पर परियोजना के विरोध रुक जाएंगे और किसानों भूमि देने व खदान खोले जाने के लिए कोल कंपनी का सहयोग भी करेंगे।




