
धर्मजयगढ़ -: रायगढ़ जिले के धर्मजयगढ़ ब्लॉक में एशिया महाद्वीप का विशाल कोल भंडार स्थापित है। सरकार द्वारा इसे दोहन करने कई कोल माइंस को कमर्शियल/ प्राइवेट व शासकीय कंपनी को आबंटन किया गया है। पिछला केंद्र सरकार द्वारा उन्हें 2008-09 में s.e.c.l व अन्य प्राइवेट कंपनी को कोयला उत्खनन करने भूमि आबंटन किया था इसके उपरांत 2014/ में मोदी सरकार केंद्र में स्थापित होते ही खनिज संपदा की दोहन करने इस क्षेत्र में सरकारी कंपनी के अलावा कई कमर्शियल माइंस प्राइवेट कंपनी को आबंटन किया है। सरकार द्वारा अभी तक अंग्रेजी द्वारा बनी भूमि अधिकरण नीति 1894 चला रहा है और मुआवजा 1899 भारतीय स्टाम्प अधिनियम से अधिकरण क्षेत्र को मुआवजा प्रदान किया जाता रहा है। पर 2016 में केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकार के किसानो से भूमि अधिकरण करने आपसी सहमति से भूमि क्रम नीति 2016 लागू किया है। आपसी क्रम नीति – 2016 में उल्लेखित राज्य सरकार के विभिन्न विभागों उपक्रमों/ संस्थाओं को उनकी अधोसंस्थाना निर्माण एवं विकास परियोजना के क्रियान्वयन के लिए समय समय पर निजी भूमि क्रय करनी होती है। जिसमें भू धारकों को आपसी सहमति से भूमि प्राप्त की जा सकती है नियमों के तहत भूमि विकास कि विकल्प उन्हें प्रक्रियात्मक सुगमता समय की बचत विक्रय मूल्य की शीघ्र प्राप्ति आदि कारणों से भी आकर्षित करता
हैं।

आपसी सहमति से राज्य शासन द्वारा भूमि धारकों से भूमि क्रम करना कई परिस्थितियों में दोनों पक्षों के साथ साथ व्यापक लोकहित में लाभकारी है। अतः संविधान की राज्य के विषय क्रमांक 18 (भूमि अंतरण) की शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य शासन लोकहित परियोजना के चालू करने आपसी सहमति से भूमि क्रम नीति जारी नियमानुसार कर सकती है। राज्य सरकार द्वारा भू धारकों से भूमि क्रम करने के लिए भूमि की प्रतिफल) दर भू स्वामी को इतनी अतिरिक्त राशि और भुगतान की जावेगी कि पड़त भूमि 6 प्रति एकड़ एक फ़सली 8 व सिंचित 10 लाख रुपए प्रति एकड़ न्यूनतम प्राप्त हो। याने राज्य सरकार द्वारा सिंचित भूमि (दो फसली) के लिए किसानों को प्रति एकड़ न्यूनतम 10 लाख हो जाने का प्रावधान किया है। सवाल उठता है जब सार्वजनिक उपक्रम अधोसंरचना विकास के लिए उड़ीसा तेलंगाना हरियाणा उत्तरप्रदेश उत्तराखंड सरकार द्वारा अपने किसानों की भूमि क्रय करने 40 लाख से 1.50 करोड़ रुपए निर्धारित किया है फिर ( छ ग) सरकार द्वारा 6,8,10, लाख क्यों जबकि यह नीति/ नियम रमन सरकार द्वारा ली गई थी और आज डबल इंजन की सरकार है । इसे बढ़ाया नहीं गया। चूंकि हमारे किसानों की भूमि के नीचे एक एकड़ में कई करोड़ की काला सोना है। उसे प्राइवेट सरकारी कंपनी कोयला दोहन करने भूमि आबंटन कर दिया। और अन्य राज्यों से क्रम घोषित करवाया।
वर्तमान सरकार ने 1899 अधिनियम के लिए ज्यादा भूमि का दर निर्धारित कर दिया है जबकि इस क्षेत्र की परियोजना के लिए धारा 11 (1) का प्रकाशन 2016 व 2020 में हो चुका है क्या कंपनी के द्वारा वर्तमान प्रचलित दह से किसानों की भूमि की मुआवजा निर्धारित करेगा या धारा 4 (1) प्रकाशन दिनांक से या 2016 भूमि क्रम नीति को लागू करेगा। निश्चितता न होने के कारण प्रभावित क्षेत्र के कारण जमीन नहीं देने के लिए एक सुर में विरोध जता रहे हैं




