
धर्मजयगढ़ -: राज्य शासन द्वारा प्रदेश मे निवासरत आदिवाशियों व अन्य सामुदाय के लोगो को जीवन स्तर बेहतर बनाने व मौलिक सुविधाऐ देने के लिए समय- समय पर जनहित की योजनाय चलाती हैँ जिसमे प्रमुख योजनाएं मे भूमिहिनो को कस्तकारी करने भूमि स्वामी हक़ पट्टा वितरण किया गया पूर्व वर्ती सरकार हो या वर्त्तमान सरकार इस योजनाओं को आजादी के बाद से भूर्त रूप देते हुए नियमों के तहत भूमि आबंटन किया है। कुछ माफियाओ के द्वारा नियमों को दरकिनार कर अवैधनिक रूप से इन ज़मीनो का हेरा फेरी किया जा रहा है। शासन के जनहितवी योजना मे 1979 -80 मे भूमिहिनो के भूमि आबंटन किया था वही बंगाली विस्थापितों को आर. आर. नंबर (रजिस्ट्रेशन परिवार ) के आधार पर पुर्णवास आबंटन पट्टा 2016 मे दिया गया था। तथा पूर्व वर्ती सरकार द्वारा वनभूमि मे काबिज आदिवासियों को 20 वर्षो तक कब्ज़ा की कस्तकारी करने पिछड़ा व सामान्य वर्ग के लोगो को 75 वर्ष की काबिज भूमि पर कस्तकारी करने व न्यायलय तहसील मे काबिज भूमि का बेदखली चालान जमा करने पर वन समिति नगर पंचायतो की प्रस्ताव के अनुसार भूमि स्वामी हक़ प्रदान किया गया था। जो छ. ग. भू राजस्व संहिता 1959 की धारा 165 (7 ख) के तहत इस अबान्तिट भूमि का कलेक्टर परमिशन के अलावा वासियातनामा दाननामा बिक्रीनामा तथा बरिशान के छोड़ अन्य बिक्री नहीं जोड़ सकता। अनुविभाग धर्मजयगढ़ मे वन अ बंटित भूमि का भू राजस्व संहिता 1959 (7 ख ) का अवेहेलना करते हुए कई भूमि का क्रय विक्रय व नामांतरण हो चूका है।जिसमे

पुर्णवास विभाग के द्वारा विस्थापित बंगाली परिवार को दी गयी। आबंटन भूमि का राजस्व रिकॉर्ड की हेर फेर काट पीट करते हुए नाम चढ़वा लिया तथा परिवार के अन्य सदस्यो के नाम कुटरचना कर चढ़वा लिया तथा कई भूमि धारको द्वारा ज़मीन की खरीदी बिक्री किया। कई लोग द्वारा आबंटन भूमि का प्लांटिंग कर बेचा गया है। चुकि इन विस्थापितों के द्वारा नियम विरुद्ध क्रय करने वाले भूमि का डायवार्सन कर पेट्रोल पम्प राइस मिल तथा कई ऊँची ऊँची इमारते खड़ी करने बैंको से कर्ज लेकर निर्माण कर चुके हैं। इन विक्रेताओं के द्वारा परमिशन के नाम पर भूमि स्वामी अधिकार प्रमाण पत्र ” जिलाध्यक्ष से लेकर स्थानियों अधिकारियो से मिली भगत कर रजिस्ट्री कर नामांतरण करवा लिया है। ” छ. ग. भू राजस्व संहिता 1959 की धारा 165 (7 ख ) के अनुसार ” उपधारा (1) मे अंतविस्ट किसी बात के होते हुए कोई भी ऐसा व्यक्ति जो कोई राज्य सरकार से धारण करता है या कोई भी ऐसा व्यक्ति जो 158 की उपधारा (3) के अधीन भू स्वामी अधिकार मे भूमि धारण करता है। अथवा जिसे कोई भूमि सरकारी पट्टेदार के रूप मे दखल मे रखने का राज्य सरकार या कलेक्टर द्वारा दिया जाता है। तत्पश्चात ऐसे भूमि का भूमि स्वामी का बन जाता है। ऐसी भूमि का अंतरण कलेक्टर की अनुज्ञा जो लेख वृद्ध किये जाने कारणों ही दी जावेगी के बिना नहीं करेगा। ” कलेक्टर रायगढ़ द्वारा भू राजस्व संहिता 1959 की धारा 165 (7 ख) के अनुसार क्षेत्रों मे कई पट्टा को निरस्त कर चूका है। कलेक्टर रायगढ़ को पुर्णवास भूमि मे हेर फेर कर चढ़वाने व भूमिहीन बनकर पट्टा पा लेने की शिकायत तो हुयी है। जिसकी जांच न्यायलय तहसीलदार द्वारा किया जा रहा है। तथा ” आबांटन भूमि जिस प्रकार भूमि स्वामी अधिकार प्रमाण पत्र पाकर क्रय विक्रय किया गया और कई भूमि का प्लांटिंग किया गया वैद्य परिजन के अलावा अन्य लोगो का नाम दर्ज करवाया गया।एवं विस्थापित परिवारों की दी गयी। अबानटिट भूमि का जांच कर अवैधनिक रूप से पट्टा को जांच कर निरस्त करते हुए नियमों के उलंघन करने वालो पर कानूनन कार्यवाही करना चाहिए क्षेत्र मे कई कोल परियोजना चालू होने वाला है। वास्तविक किसान को मुआवजा मिलना चाहिए और अवैध पर कार्यवाही।




