
धर्मजयगढ़-: रायगढ़ जिले के धर्मजयगढ़ तहसील में केंद्रीय कोयला मंत्रालय द्वारा नगर पंचायत से लगकर s.e.c.l, k.p.c.l नीलकंठ पी.आर. ए तथा इंद्रमणि पावर लिमिटेड को कोयलार पंचायत व पूर्व में आमापाली पंचायत तक भूमि आबंटन कर दिया। डबल इंजन सरकार के दूसरे इंजन याने साय सरकार ने भी इसे स्वीकृत प्रदान किया इस कंपनियों दायरा तहसील कार्यालय से महज -10-14 k.m तक है। इन पांचों कोल कंपनी में एक कंपनी s.e.c.l शासकीय व के. पी .सी .एल कर्नाटक सरकार का उपक्रम है । पांचों माइंस ओपन माइंस है। इस कोल कंपनी कोयला खदान खोले ना जाने व विस्थापित होने की डर से विरोध जारी है। पिछले माह तहसील मुख्यालय से 20-22 कि. मी दूरी पर पुरंगा कोल माइंस की पर्यावरण जनसुनवाई के लिए प्रभावित ग्रामीणों द्वारा भारी विरोध करने पर प्रशासन द्वारा निर्धारित तिथि में पर्यावरण जनसुनवाई आगामी आदेश तक स्थगित करने पर अन्य क्षेत्रों में स्थापित होने वाली कोल माइंस का प्रभावित किसानों द्वारा विरोध करना आरम्भ कर दिया है चूंकि शासकीय व अशासकीय कंपनी को भूमि 2014 व 2019 में प्राप्त हो चुका था। परंतु उस समय प्रभावित ग्रामीणों द्वारा विरोध दर्ज नहीं किया था। तथा 2018/22
को छ. ग के तत्कालीन।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की धर्मजयगढ़ प्रवास के द्वारा प्रभावित क्षेत्रों के जनप्रतिनिधि सरपंच व नगर क्षेत्र के पार्षद व एल्डरमैन के द्वारा आवेदन देकर s.e.c.l कोल ब्लॉक को जगदलपुर टाटा स्टील प्लांट की चालू होने में देरी के कारण निरस्त करने का हवाला देकर।

दुर्गापुर।।ओपन कोल ब्लॉक की निरस्त करने की मांग किया था। विपक्ष दल के प्रदेश मुख्यमंत्री होने के बावजूद ढार के तीन पात साबित हुआ। यह बताना लाजमी होगा कि s.e.c.l को लगभग 1700 हे० एवं के. पी. सी. एल के 1629 हे० भूमि शासकीय निजी भूमि का कोयला धारक क्षेत्र (अर्जन एवं विकास) अधिनियम 1957 के तहत व इनको कोल मंत्रालय भारत सरकार (मोदी सरकार) व राज्य सरकार (रमन साय सरकार) द्वारा नियमों के तहत भूमि आबंटन किया गया है। दोनों कंपनी में नगरीय क्षेत्र से लेकर 7 ग्रामों के किसानी का भूमि आबंटन किया जाना है तथा s.e.c.l द्वारा सर्वेक्षण के लिए व धारा 23 के तहत सर्वे का कार्य चालू करने के पूर्व प्रभावित ग्रामीणों द्वारा पेशा एक्ट 1996 की तहत जल जंगल और जमीन हमारा है। को लेकर नियमों के तहत ग्राम सभा के कंपनी न खोले जाने व विस्थापित होने के डर से प्रस्ताव/ अभिमत. पास कर रहे हैं। कंपनी प्रबंधन द्वारा जब तक अधिग्रहीत क्षेत्र के किसानो को विश्वास में नहीं ले लेता व विस्थापितों की व्यवस्था के साथ साथ निजी भूमि का दर निर्धारित नहीं करता। तो इन्हें काला सोना की खुदाई करने जैसे सालों लग गए धारा 23 तक आने में। या कंपनी को परियोजना से पीछे हाथ खींचना होगा।




