


धर्मजयगढ़ -: पिछली छत्तीसगढ़ सरकार ने एलिफ़ेंट रिजर्व के लिए कोरबा जिले उध एरिया धर्मजयगढ़ वन मण्डल के बोरो रेंज व कापू रेंज की कुछ सीमा को लेकर क्रेद्र सरकार के पास एलिफ़ेंट केरिडोर बनाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया था। क्रेद्र सरकार द्वारा उपरोक्त क्षेत्र मे कोयला की विशाल भंडार होने के कारण उसके दोहन करने के लिए प्रस्तवित एलिफ़ेंट रिजर्व सीमा मे कोयला उत्तखनन करने कई प्राइवेट व सरकारी कंपनियों को ज़मीन उपलब्ध कराई गयी है। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के धर्मजयगढ़ वन मण्डल क एक बड़ा भू भाग जंगलो से भरा हुआ है। इन जंगलो के बीच आदिवाशियों का ग्राम है। जहाँ निवास करते हैं। प्रतिवर्ष इन ग्रामवासियो के अपने फसल बचाने के लिए हाथियो के साथ दृन्द के कारण इस वर्ष 5 से 7 हाथियो की जान चली गयी है। तथा जनवरी से दिसम्बर तक लगभग 14 लोगो की जान चली गयी है। तथा कापू धर्मजयगढ़ छाल बाका रुमा क्षेत्र के निवासरत लोगो की काफी फसल का नुकसान किया है। घने जंगल क्षेत्र होने के कारण हाथियो का दल झारखण्ड और उड़ीसा से यहाँ विचरण करते हैं। वर्तमान मे धर्मजयगढ़ वन मण्डल के 10 बीट मे 47 हाथी विचरण कर रहे है जिनके मादा और शावक भी शामिल है। सरकार द्वारा क्या जीव सरक्षण अधिनियम 1972 के अनुसार इन वन्य जीवो को हानि पहुंचाने पर इनके विरुद्ध कानूनी कार्यवाही किया जाता है। तथा इस अधिनियम के तहत 1980-86 के बीच 06 पेड़ो को सरंक्षित वन के लिए कानून बनाया गया है। इन्हे हानि व नुकसान पहुंचाने पर कानूनी कार्यवाही किया जाना सुनिश्चित किया गया है। सरकार द्वारा बनाई गयी वन जीव सरक्षण अधिनियम के तहत हाथियो के नुकसान पर कानूनी कार्यवाही व दूसरी तरफ इन पूरी हाथियो के विचरण क्षेत्र मे कोयला उतखनन करने सरकार द्वारा 18 कोल ब्लॉक नीलामी के लिए लाइन पर है। इसमें दुर्गापुर कोल ब्लॉक दुर्गापुर सरिया कोल ब्लॉक नीलकंड इंद्रामणि पी. आर. ए. व पुरुँगा ब्लॉक आबंटन हो चूका है। इसके अलावा 12 कोल ब्लाको मे नवागांव ईस्ट वेस्ट ओंगना पोटिया कोयलार चैनपुर रामनगर तेन्दुमुड़ी फतेहपुर ईस्ट वेस्ट और छाल कोल ब्लॉक शामिल है। नवंबर मे अडानी के अबंत्रित पुरुँगा अंडरग्राउंड कोल माइंस की पर्यावरणीय जनसुनवाई पर ग्रामीणों की भारी जनआक्रोश व विरोध के कारण प्रशासन को जनसुनवाई आगामी आदेश तक निरस्त करने की सुचना जारी किया गया था। इन विरोध की सफलता को लेकर रायगढ़ जिला के धर्मजयगढ़ ब्लॉक पांचवी अनुसूची मे शामिल होने के कारण पेशा कानून के तहत ग्राम सभा से अनुमति नहीं लेने के कारण प्रभावित क्षेत्रों व संभावित क्षेत्र के कोल ब्लॉक के ग्रामीण एक जुट होकर विरोध करने का मन बना लिया है। सरकार एक तरफ वन्य जीव सरक्षण अधिनियम लागू किया है। और लेमरू प्रोजेक्ट को रिजेक्ट करते हुए एलिफ़ेंट प्रभावित सीमा मे कोल माइंस आबंटन कर ग्रामीणों को नाराज कर रहे हैं। प्रभावित वन मण्डल क्षेत्र के ग्रामीणों द्वारा सरकार की इस नीति से दुखी मन से पिछले सरकार के द्वारा किया गया कार्य को सराहा जा रहा है। लेमरू एलिफ़ेंट केरिडोर को सरकार यदि स्वीकृति प्रदान करती है तो हाथियो के साथ क्षेत्र मे हाथियों द्वारा हो रही जन धन दकी छति नहीं होंगी।




