

धर्मजयगढ़ _ दुर्गापुर।। खुली खदान को दक्षिण पूर्वी कोल फील्स कंपनी को 2016 में भूमि पर से समस्त अधिकार केंद्र वराज्य सरकार द्वारा दिए जाने पर अधिग्रहीत क्षेत्र के किसानो के द्वारा अनु. अधि. (रा ०) को पुर्नवास कॉलोनी का बाजार मूल्य निर्धारण करने व समीपकरता । ग्राम तरईमार का बाजार मूल्य के बराबर देने की मांग की है। तथा कोल फील्स कंपनी के महाप्रबंधक रायगढ़ क्षेत्र के द्वारा अनुविभागीय अधिकारी (रा०) को अर्जन पश्चात भूमि का क्रय _ विक्रय को वैद्य माना नहीं जावेगा जिस पर कार्यवाही करने का र्निवेदन/ अवलोकनार्थ दिया गया है। वहीं वर्तमान विरोध करने वाले किसान पहले मुआवजा बढ़ाने की मांग किया था। दक्षिण पूर्वी कोल फील्ड्स कंपनी द्वारा पुर्नवास कॉलोनी धर्मजयगढ़ व बायसी कॉलोनी की ह. न. से लगभग 4414 एकड़ में 1600 एकड़ भूमि अधिग्रहीत किया है। परंतु पुनर्वास हल्का का पिछले 65 वर्षों से क्रय _विक्रय न होने के कारण बाजार मूल्य साधारण है। तथा परियोजना की समीपवर्ती ग्राम तरईमार में भूमि की खरीदी बिक्री किया गया है। अत: माननीय अनु. अधि. (रा०) से समीवार्वी ग्राम का बाजार मूल्य निर्धारित करते हुए मुआवजा की मांग की है। आवेदनकर्ता में कई किसान शासन के नियमों के विरुद्ध पट्टा बनवा लिया है तथा अभी अभी s.e.c.l द्वारा खदान खोले की कार्यवाही किए जाने पर विरोध करने लगे हैं। दूसरे तरफ रायगढ़ क्षेत्र s.e.c.l के महाप्रबंधक द्वारा अनु. अधि. (रा०) को संदमित पश्र क्रमांक 1201/ वाचक _2/अ. वि. अ/2022 5/9/ 2022 को जारी अनुसार दिनांक 14/9/2022 को संदर्भ क्रमांक s.e.c.l/म० प्र ०/ राय./ भू राज/22/23/203 के अनुसार तथा भारत की राजस्व संख्या 293 नई दिल्ली 5/2/2014 में प्रकाशित कोल आबंटन हेतु चिन्हित ग्रामों में भूमि विक्रय प्रतिबंध पर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किए जाने का निवेदन के साथ धारा 9 (1) व धारा 11 (1) प्रकाशन व अर्जन पश्चात भूमि का क्रय विक्रय वैद्य माना नहीं जावेगा तथा जिस पर देय लाभ नियमानुसार देना संभव नहीं होगा। तथा भूमि का क्रय विक्रय संबंध में s.e.c.l को अधिकार नहीं है ना ही कोई सूचना दी गई इस पर क्रय विक्रय संबंध में रोक लगाने का निवेदन करते हैं। पुनर्वास हल्का व परियोजना के अंतर्गत कई लोगों द्वारा भूमि का 2022_23 में भूमि का डायवर्सन किया तथा कई लोगों द्वारा खरीदी बिक्री भी किया इनकी सत्र में दूसरे के भूमि पर अन्य व्यक्ति द्वारा विधि विरुद्ध अपना चढ़वा लिया है। कोल कंपनी के पश्राचार के बाद मुआवजा निर्धारित करने वालो में कुछ समर्थक किसान अवैधानिक भूमि का मुआवजा न मिलने के डर से अन्य विरोध करना शुरू कर माहौल को खराब कर रहे हैं। चूंकि शासकीय कोल कंपनी राज्य या केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मापदंड के अनुसार आगे की कार्यवाही किया जाना सुनिश्चित किया है।




