
धर्मजयगढ़-: एशिया महाद्वीप में सबसे बड़ा कोल भंडार रायगढ़ जिले के धर्मजयगढ़ ब्लॉक के अंतर्गत मैनपाट की तराई से तहसील की आखिरी छोड़ एडू पश्चिम में कोरबा पूर्व में घरघोड़ा तहसील तक फैला जिसमें काला सोना का अपरंपार भंडार है। जिसको दोहन करने केंद्र सरकार की कोयला मंत्रालय द्वारा शासकीय व कमर्शियल कोल कंपनी को उत्खनन करने नियम/ प्रावधानों के तहत आबंटित किया है। जिसमें ब्लॉक की कुछ खदान s.e.c.l द्वारा 1988 से छाल ऐडू तथा जामपाली बारौद में चालू है । सरकार द्वारा धर्मजयगढ़ नगरीय क्षेत्र के वार्ड -01,02,03 से लेकर तहसील मुख्यालय से 20-22कि दूरी तक 06 शासकीय व कमर्शियल ओपन करने आबंटित किया है। जिसमें s.e.c.l कर्नाटक पावर लिमिटेड कर्नाटक सरकार की शासकीय व अर्धशासकीय तथा कमर्शियल में नीलकंठ कंपनी रामपुर इंद्रमणि पावर लिमिटेड गुजरात तथा पी.आर.ए कंपनी सूरजपुर को खुली खदान के लिए प्राप्त हुआ तथा पुरुंगा अंडर ग्राउंड कोल माइंस गौतम अडानी को प्राप्त हुआ है। भारत सरकार द्वारा आद्योगिक विकास के लिए विदेशों से कोयला आभात न करने विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने तथा राज्य व केंद्र को मिलने वाली रॉयल्टी से देश राज्य का विकास व आम लोगों को बेहतर जीवन स्टार जीने तथा बेरोजगारी दूर करने विशाल कोल भंडार दोहन करने के लिए कोयला धारक क्षेत्र (अर्जन एवं विकास) अधिनियम 1957 के तहत वर्तमान में इस खदानों से दोहन किया जाना है। S.e.c.l को 2014 व k.p.c.l को 2019 ( पूर्व में डी बी पॉवर लिमिटेड + वेदांता कोरबा) को 2009-10में आबंटित किया था। शेष 04 कमर्शियल कंपनी को 2019-23 में आबंटन हुआ है। खदान पाने के 10 वर्षों बाद s.e.c.l द्वारा 23 तक पहुंची शेष कंपनियों की डगर काफी दूर है। अधिग्रहीत क्षेत्र निवासरत ग्रामीण किसका पूरा जीवन व अपने कई पीढ़ी का गुजर बशर इन भूमि से होती है । एका एक अधिग्रहन की सूचना से भड़क उठे हैं और कोल कंपनी का विरोध करना प्रारंभ कर दिये हैं। उधर सरकार को समग्र विकास के लिए इन कोल माइंस का ओपन करना अतिआवश्यक है।




