धरमजयगढ़-: दिसंबर 1996 को राष्ट्रपति की दस्खत से अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायतों के लिए नए कानून को मंजूरी दे दी । इसके साथ ही पंचायतों के बारे में संविधान के भाग 9 में दी गई व्यवस्था में महत्वपूर्ण फेरबदल के साथ अनुसूचित क्षेत्रों में लागू हो गई। जिसे पेशा कानून उर्फ पंचायत उपबंध अधिनियम जम्मू कश्मीर को छोड़ सभी प्रदेशों में लागू हो गया। हमारे देश का यह पहला कानून है जिसमें साफ तौर पर माना गया है कि आम जन सर्व अधिकार संपन्न है और ग्राम सभा के रूप में गांव समाज का स्थान सबसे ऊंचा है। इसलिए मह कानून को हमारा कानून कहा गया है। आजादी के पूर्व महान स्वतंत्रता सेनानी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के द्वारा जो सपना देखा था राज्य सभा न लोक सभा सबसे बड़ा ग्राम सभा का सपना 49 वर्ष बाद पूरा हुआ। पेशा कानून के तहत जिस बस्ती या एक से


अधिक बस्ती के लोग मिल जुलकर समाज के रूप में काम काज कर रहे हैं।उस एक या एक से अधिक बस्ती को ही गांव अथवा ग्राम कहा गया है। और उस गांव के पूरे समाज को ग्राम सभा का दर्जा दिया गया है। प्रत्येक ग्राम सभा की परंपरा उनकी सांस्कृतिक पहचान सामुदायिक संपदा और विवादो को निपटाने की परंपरागत व्यवस्था को बनाए रखने उनके मुताबिक काम काज चलाने सक्षम होगी। याने गांव समाज की सार्वभौमिक अधिकार का घोषणा पत्र है तथा सामुदायिक संपदा मै आदिवासी समाज की अस्मिता उसके रहवास से अभिन्न रूप से जुड़ी हुई है। जल जंगल जमीन वही उसके जीवन और अस्मिता की बुनियाद है। पेशा एक्ट के तहत ग्राम सभा को 03 तरह के अधिकार सौंपे गए हैं। विकास के काम भू अर्जन से पहले ग्राम सभा का परामर्श सहमति लघु वनोपज की मालिकी हक विधान मंडलों द्वारा अपेक्षित कानूनी अधिकार में पानी पर अधिकार खनिज गौण संपदा प्रमुखता से दी गई है। एवं खनिज संपदा जो स्थानीय संसाधन का अंग है इसका पूरा प्रबंधन ग्राम सभा का है। तत्कालीन रूप से हमारा कानून (पेशा एक्ट) में गिट्टी पत्थर रेत ग्रेनाइट गौण खनिज के मामले में ग्राम सभा को सरकार द्वारा कानून दी गई व्यवस्था में शामिल है तथा पूर्वेक्षण (सर्वे से पहले ) के लिए अनुमति व खनन पट्टा देने से पहले ग्राम सभा की सिफारिश/ सहमति अनिवार्य की गई है। परंतु इस कानून (पेशा ) के तहत खनिज संपदा जैसे सोना चांदी लोहा कोयला अन्य धातुओ की उत्खनन करने व देने का अब तक चली आ रही अपने अधिकार (1894) को अपने पास रखा है। इन्हें ग्राम सभा से सरकार को सहमति/सिफारिश को अधिकार के रूप में नहीं दिया है। जो पेशा कानून 1996 में उल्लेखित/ दर्ज है। पेशा कानून 1996 में सरकार खनिज संपदा पर अपना अधिकार रखा है व भू अर्जन पुर्नवासन और पुर्नव्यस्थापन में उचित प्रतिकार अधिनियम 2013 पारित कानून के तहत धारा 81 के अंतर्गत जिलाध्यक्ष द्वारा

सार्वजनिक हित की प्रयोजन के लिए बंजर व कृषि भूमि 3 वर्ष या उससे अधिक वर्षों तक अधिभोग और उपयोग करने की पूरी शक्ति समुचित सरकार (राज्य) दे रखी है। ऐसे में खनिज संपदा के पूर्वेक्षण व उत्खनन कार्य करने पर ग्राम सभा द्वारा आपत्ति/ अनापति पेशा कानून का उल्लंघन है उपबंध में यह अवश्य है जल जंगल और जमीन पर आदिवासियों का व ग्राम समाज का पहला अधिकार है।





