
धरमजयगढ़ बारिश की मौसम अक्टूबर में समाप्त होने के बाद धर्मजयगढ़ के आस पास में कच्ची लाल ईंटा (बंगला ) का बनाने का काम जोर शोर से बिना खनिज विभाग रायगढ़ के अनुमति से बनाया जा रहा है तथा इसे पकाने के लिए एक दो गाड़ी कोयला की रॉयल्टी काट कर शेष कोयला एस ई सी एल की अधिग्रहीत क्षेत्र से निकलाकर पकाया जा रहा है। नियमों के अनुसार किसान अपने निजी काम के लिए 50 हजार इंटा विभाग से अनुमति लेकर बना सकता है धर्मजयगढ़ तहसील के आस पास के ग्राम पंचायतों में कुछ व्यापारी जो ईंटों का व्यवसाय करते हैं। प्रति व्यापारी 10 से 20 लाख ईंटे बनाता है और बाजार में प्रति ईंटे 3 से 4 रुपए में बेचता है। इन ईंटों को पकाने के लिए इन व्यवसाई लोग क्षेत्र से कोयला का 2 नंबर तरीके से दोहन कर उपयोग करते हैं। तथा कुछ टन कोयला खरीदकर रॉयल्टी व खरीदी का पर्ची बना रखा है।इन एक दो गाड़ी कोयला खरीदकर इनके आड़ में पूरी मई माह तक 10 से 20 पथेरा (ईंट बनाने वाले) लोग से ईंटा बनाया जाता हैं। सबसे अहम बात है कि एस.ई.सी.एल को शासन द्वारा भूमि पद से समस्त अधिकार फरवरी 2016 में प्राप्त कर लिया है इन माफियों के कारण एस.ई.सी.एल द्वारा नियमों के तहत किया जा रहा गतिविधियों को रोकने के लिए किसानों को बड़गला कर विरोध करते है। जिस कारण आज यह प्रोजेक्ट 10 वर्ष पीछे हो गया है। कोयला देने वाले मजदूर पूरे सीजन में जान जोखिम में डालकर सिर्फ अपना रोजी रोटी का भरण पोषण कर पा रहा है। और इन अवैधानिक लोग सीजन भर 20 से 30 लाख रुपए आय अर्जित करता है। शासन के अलावा बंग ला इंटा से निर्माण कराया जाना अवैधानिक है व बांग्ला इंटा का निर्माण करने के लिए अनुमति लिया जाना आवश्यक है परंतु धर्मजयगढ़ तहसील के ग्राम पंचायतों में सालों से कच्ची ईंटों का काम कुछ चिन्हित लोग करते आ रहे हैं। शासन को इन अवैधानिक तरीके से बनाया जा रहा इंटा व इन्हें पकाने के लिए उपयोग में लाई जाने वाली 2 नंबर कोयला की जांच कर इन पर कड़ी कार्यवाही किया जाना चाहिए। इस चीज की वन विभाग और पटवारी को जानकारी रहते हुए नजर अंदाज करते हैं।




