
धरमजयगढ़-: सरकार की महात्वाकांक्षी योजना नगरीय क्षेत्र में निवासरत प्रत्येक लोगों की शुद्ध पे जल पहुंचाना जिसके लिए धर्मजयगढ़ क्षेत्र में 2009-10 में 10 करोड़ रुपए आबंटन किया था। कार्य देरी होने से खर्च 2 करोड़ बढ़ गया तथा नगरीय निकाय द्वारा सुपरवाइजिंग चार्ज पूरी राशि का 15% वसूलना कुल मिलाकर लगभग 14 करोड़ की योजना फेल हो चुकी थी । जिसमें 03 ओवर हैंड टैंक शामिल है। जो योजना प्रारंभ के 16 वर्ष के बाद चालू नहीं जो सिर्फ शो पीस बनकर रह गया। तथा नगर में नई परिषद का गठन होने के कुछ माह बाद अपूर्ण कार्य को हैंड ओवर के लिया। 2005-07 में पूरी नगर को शुद्ध पे जल उपलब्ध करने p.h.e द्वारा शासन से प्राप्त करोड़ों रुपए आबंटन करने व क्रियान्वपन करने वार्ड- 08 में हैंड ओवर हेड टैंक निर्मित किया गया था। उक्त पानी टंकी चालू तो हुआ परन्तु नगर को पानी उपलब्ध नहीं करा पाया। उसके उपरांत नई स्टीमेट बनाकर वार्ड -13 मांड नदी से पानी रिसाइबलिंग कर सप्लाई करने व पूरी नगरीय क्षेत्र की 15 वार्डो में पेयजल उपलब्ध करने जल आवर्धनयोजना को भूतरूप देने 14 करोड़ रुपए स्वीकृत करा लिया परंतु एक टंकी की छोड़ दूसरा अन्य टंकी पर आजतक पानी नहीं चढ़ा पाया। तथा ठेकेदार को लाभ पहुंचाने पूरी वार्ड में कॉस्ट आयरन का पाइप लाइन बिछा दिया परन्तु योजना ढाक के तीन पात साबित हुआ। वर्तमान नगर पंचायत के पूर्व परिषद को हैंडओवर देने p.h.e द्वारा कई बार आवेदन निवेदन प्रस्तुत किया था। परंतु कार्य अपूर्ण होने व योजना फेल होने के कारण परिषद की बैठक में हैंड ओवर लेने से इंकार कर दिया परन्तु वर्तमान परिषद मार्च 2025 में गठित होने व दूसरा तीसरा सम्मेलन में इसे हैंड ओवर ले लिया। हैंड ओवर लेने के 3 माह उपरांत नगर पंचायत द्वारा चालू नहीं कर पाया। चूंकि ग्रीष्म वस्तु में नगर क्षेत्र में पानी की किल्लत हो जाता हैं। जल आवर्धन योजना को पूर्ण कर हैंड ओवर देने के लिए शीतकालीन सत्र 2024 में स्थानीय विधायक श्री लालजीत सिंह राठिया द्वारा विधान सभा में हो हल्ला किया परंतु सरकार द्वारा इस पर कोई निर्णय कदम नहीं उठाया । सवाल उठता है कि जनता के द्वारा दी गई कर/ रैम्स से सरकार जनताओं को सुविधाएं उपलब्ध कराता है । पर सरकारी कर्मचारी अपने व अपने लोगों की लाभ के लिए अमस रहते हैं। जिससे आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है सरकार निर्माण ठेकेदारों पर गलत होने पर कार्यवाही करती है परंतु सरकार कि योजना को चुना लगाने वाले विभागीय कर्मचारी अधिकारी पर कार्यवाही क्यों नहीं करती।




