
धर्मजयगढ़ धर्मजयगढ़ एरिया के किसान इन दोनों खरीफ फसल धान मक्का फसल पाने के बाद रबी फसल के लिए जुट गए हैं। मुख्य रूप से सब्जी _ भाजी में किसान तीनों प्रकार के गोभी आलू मटर बैगन मूंगफली व मक्का की खेती की बोआई के साथ क्षेत्रों में तरबूज की खेती में जुट गए हैं। किसानों के द्वारा जून _ जुलाई में धान व मक्का बोने व उसके उपज को नवंबर _ दिसंबर में काटे जाने के बाद अधिक पानी वाली भूमि (बहला) खेत में धान बोया जाता है । तथा अधिकांश किसान इयाबवेल के सहारे अपने खेत में धान सब्जी के विभिन्न किस्मों के साथ साथ मक्का की खेती कर रहे हैं। एवं इस क्षेत्र बालुई मिट्टी होने होने के कारण तरबूज की खेती जोर दार होता है। बहुत किसान अपने भूमि पर पानी की उपलब्ध अनुसार खेतों में तरबूज की बीज लगा रहे हैं कई किसान लोग बीज लगा भी चुके हैं। ठंड की सीजन दिसंबर से मार्च तक मौसम ठंडा रहता है तथा खेती करने की लागत से आप ज्यादा होता हैं क्योंकि इस सीजन में कीट प्ररोप भी खेतों में कम लगता है। तथा पानी भी कम लगता है। के आस पास धर्मजयगढ़ के गांवों में खासकर बंगाली के साथ साथ अन्य किसानों के द्वारा अभक मेहनत से बंजर भूमि को उपजाऊ बनाया है इन लोगों द्वारा मौसम के अनुकूल व पानी की उपलब्धता तथा बिजली वोल्टेज की समस्या को देखते हुए लगभग 2000 एकड़ में प्रतिवर्ष तरबूज की खेती करते हैं जो मार्च अप्रैल में खेतों से उठाऊं दूसरे राज्य के व्यापारी मंडी के लोग करते हैं। तथा 1500 एकड़ में मक्का की खेती करते हैं अधिकांश किसानों के द्वारा मक्का के बीज व तरबूज की बीज खेतों में लगा चुका है। कुछ किसानों मौसम की अनुकूलता के हिसाब से मूंगफली व विभिन्न प्रकार की सब्जियों का उत्पादन करते हैं। क्षेत्रों में एक भी उद्योग फैक्ट्री न होने के कारण शिक्षित युवा लोग खेती की आधुनिक तरीका डिप सिस्टम से चालू किया है जो पढ़ाई के साथ साथ अपनी आय बढ़ाने के लिए पूरी लगन से लगे हुए हैं। क्षेत्र में किसानों को तरबूज एवं मक्के मूंगफली की खेती से खरीफ फसल की तुलना में रबी फसल में अधिक आय प्राप्त करता है।




