

सत्यपाल सिंह राजपूत, रायपुर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) द्वारा आयुष्मान योजना के अंतर्गत चिन्हांकित अति जोखिम (VERY HIGH RISK) स्कोर वाले 17 अस्पतालों का निरीक्षण कर संचालनालय, स्वास्थ्य सेवाएं, छत्तीसगढ़ द्वारा गठित राज्य स्तरीय जांच दल ने आवश्यक दस्तावेजों की पड़ताल की.जांच के दायरे में रायपुर के 7, बिलासपुर के 3, दुर्ग के 2 तथा सरगुजा, बस्तर, कबीरधाम, कोंडागांव और कोरबा के एक-एक अस्पताल शामिल हैं. फर्जी मरीज भर्ती करने, नगद राशि लेने, स्वास्थ व्यक्ति को मरीज बताकर भर्ती करने जैसी शिकायतों के आधार पर जांच की कार्रवाई की गई है. इस दौरान संबंधित अस्पतालों से आयुष्मान योजना के अंतर्गत मरीजों को उपलब्ध कराए गए उपचार से संबंधित दस्तावेज प्राप्त किए गए हैं. इन दस्तावेजों का विस्तृत परीक्षण किया जाएगा तथा जांच में प्राप्त तथ्यों एवं निष्कर्षों के आधार पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.
प्रदेश के सात जिलों के जिन अस्पतालों की जांच की गई, उनमें बस्तर में एससीएच हॉस्पिटल, बिलासपुर में अशोक प्रसूति मंदिर, केयर एन क्योर मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, मेहता चिल्ड्रन नर्सिंग होम, दुर्ग में श्री शंकराचार्य इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, पल्स हॉस्पिटल, कबीरधाम में जय जगन्नाथ हेल्थकेयर, कोंडागांव में नेताम हॉस्पिटल एंड इनफर्टिलिटी सेंटर, कोरबा में हरि कृष्णा केयर हॉस्पिटल, रायपुर में एसआरआईएमएसआर श्री रावतपुरा सरकार हॉस्पिटल, श्री महावीर हॉस्पिटल, एसके केयर हॉस्पिटल, विजन सेंटर आई हॉस्पिटल, वरदान हॉस्पिटल, सरगुजा में डीएचटी केयर हॉस्पिटल में जांच की गई.दो अस्पतालों पर की कार्रवाई
राज्य स्तरीय जांच दल की अनुशंसा के आधार पर 28 एवं 29 सितंबर को रायपुर स्थित मेडलाइफ हॉस्पिटल और लोटस हॉस्पिटल के विरुद्ध आयुष्मान योजना से डी-इंपेनलमेंट की कार्रवाई भी की गई है.
स्वास्थ्य विभाग की सतत निगरानी
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के निर्देशानुसार, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा आयुष्मान योजना के अंतर्गत अस्पतालों में उपचार तथा दावों की प्रक्रिया की सतत जांच एवं निगरानी की जा रही है. इसका उद्देश्य आयुष्मान योजना के पात्र हितग्राहियों को गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी एवं नियमानुसार स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना तथा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को और मजबूत करना है.





