

धर्मजयगढ़ :- पुरुंगा अंडर ग्राउंड कोल माइंस के पर्यावरण जनसुनवाई 11 नवंबर को होना प्रस्तावित था। ग्रामीणों के भारी विरोध व आक्रोश को देखते हुए कंपनी प्रबंधन और प्रशासन द्वारा उपरोक्त जनसुनवाई अभी के लिए निरस्त किया गया है।s.e.c.l का प्रस्तावित खदान 2014 का है और k.p.c.l का प्रस्तावित खदान 2020 का है। इस प्रभावित क्षेत्र के किसान अन्य जब धारा 23_24 लागू हो गया है। जमीन न देने के लिए लाभभेद हो रहे हैं। विरोध में माहौल बनाने आज 20/11/25 को क्लब ग्राउंड में बैठक कर अनुविभागीय अधिकारी के नाम ज्ञापन दिया गया है । यह बता दें कि s.e.c.l द्वारा दुर्गापुर।। ओपन कास्ट कोल माइंस के लिए 4414 एकड़ भूमि प्रस्तावित है। जिसका धारा 4 (1)का प्रकाशन 5/2/2014 तथा धारा 11 (1) 4/21/2016 को राजपक्ष में प्रकाशन के साथ बिना किसान व ग्रामीणों की आपत्ति न होने के पर भूमि पर से सभी अधिकार अर्जित किए गए। ठीक उसी प्रकार d.b Power limited व वेदांता की प्रस्तावित भूमि तय समयनूसार न खदान न खोले जाने पर 2020 में k.p.c.l को केंद्रसरकार द्वारा प्रदान किया गया जिसमें राज्यसरकार भी सहमति दे दी। एवं डी वी पावर व वेदांता की कुल 1639 हे० भूमि k.p.c l को प्रस्तावित नियमानुसार मर्ज कर दिया। S.e.c.l द्वारा भूमि पर के समस्त अधिकार पा लेने के उपरांत प्रभावित 7 गांव के किसान s.e.c.l के चीफ c.m.d से बिलासपुर में भेट कर जमीन देने की सहमति दी। प्रभावित किसानों के द्वारा उक्त समय महापंचायत आयोजन उक्त बाते रखी गई तथा कुछ स्वार्थी व लोकहित का भावना रखने वाले प्रभावित 7 गांवों की एक समिति बनाकर कंपनी की प्रबंधन से बात करने का निर्णय लिया गया था लेकिन 10 वर्षों से अभी तक मह समिति नहीं बन पाई। कोल वर्तमान में कंपनी का विरोध करने वाले इस पीरियड में प्रभावित किसानों से औने पौने दाम में नियम विरुद्ध खरीदी करते हुए दूसरे लोगों के पास भारी _भरकम राशि में कंपनी प्रभावित होने का लालच देकर दलाली काम किया तथा इस क्षेत्र की कुछ किसानों को भूमि अधिकार प्रमाण पत्र के आधार पर डायवर्सन का खेल खेला प्रतिधित्व करने वाले में कई लोग अवैधानिक रूप से पुर्नावास पट्टा प्राप्त किया तथा कई लोग प्रभावित क्षेत्र से कोयला खनन कर बंगला ईंटों का व्यवसाय करने में व्यस्त है। एक बार जमीन नहीं देना अच्छी बात है विस्थावित होकर सेटलमेंट होने 60 वर्ष लग गए फिर विस्थावित होने पर फिर सेटलमेंट होने कई पीढ़ी चले जाएंगे। परंतु विरोध धारा 4 (1) लगने के साथ विरोध करना था चूंकि धारा 23_24 पूरी प्रक्रिया चल रहा है प्रशासन नियमत कंपनी का सहयोग करेगा तथा विरोध करना है तो राज्य व केंद्र सरकार का विरोध करना चाहिए जिन्होंने भूमि देने का निर्णय लिया गया। चिड़िया चूक गई खेत अब पहरेदारी करने का अर्थ सीधा साधा स्वार्थी लोग अपना स्वार्थ सिद्ध करने लगे है।




