

धर्मजयगढ़ -: रायगढ़ जिले के धर्मजयगढ़ तहसील में भारत सरकार द्वारा भारत व बंगलादेश विभाजन के समय 642 वो परिवार को r.r.no ( रिफ्यूजी रजिस्ट्रेशन नंबर) प्रदान करते हुए 7 एकड़ व 5 एकड़ भूमि प्रदान करते हुए धर्मजयगढ़ कॉलोनी बायसी कॉलोनी व सागरपुर कॉलोनी दर्शाया गया /इन विस्थापितों को राज्य शासन केके आपदा प्रबंधन रायपुर पुर्नावास विभाग नया रायपुर द्वारा जारी पत्र क्रमांक/123/28/2006/181 दिनांक 30/04/2014 के निर्देश/ आदेशानुसार _भूमि स्वामी हक प्रदान करने जारी किया था। तहसीलदार धर्मजयगढ़ के द्वारा उक्त आदेशानुसार 2016_17 में विस्थापितों को आवश्यमक कर्णकट उपलब्ध कराने के पश्चात भूमि स्वामी हक दिया गया। जिनमें से लगभग 15_20 गैर विस्थापित परिवारों के द्वारा पटवारियों से सांठ गांठ कर बनवा लिया है। न्यायालय तहसीलदार द्वारा इन विस्थापितों को पट्टा देने से पूर्व जारी दावा आपत्ति मंगवाया गया था। निर्धारित समयावधि में समाज के जागरूक पूर्व पार्षद व अन्य के द्वारा न्यायालय तहसीलदार/ इस्थार /9/8/2016 के परिपड्य में दिनांक 24/8/2016 को आपत्ति करते हुए आवेदन देते हुए सचिव (राजस्व) आपदा प्रबंधन एवं पुर्नावास विभाग नया रायपुर जिलाध्यक्ष रायगढ़ एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) धर्मजयगढ़ आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित करते हुए पट्टा प्राप्त करने वाले विस्थापित को r.r.no की जांच करते हुए पट्टा देने की मांग की थी। आपत्ति आवेदकों द्वारा अपने आपत्ति में उल्लेखित करते हुए लिखा कि शासन द्वारा परिवार के मुखिया के नाम से एक ही अस्थाई पट्टा प्रदान किया गया था। परंतु कुछ लोगों द्वारा कुटरथित कर अपने परिवार के अन्य सदस्यों के नाम रिक्त पड़े भूमि पर कब्जा करते हुए नियम विरुद्ध खसरा बी _1 में नाम जोड़ लिया। जो भूमि स्वामी पाने आवेदन प्रस्तुत किया गया जिस कारण कुल 642 खातेदारों से 656 खाते डार हो गया जिस कारण इनकी r.r.no की जांच करते हुए पट्टा जारी करने निवेदन किया गया था। तत्कालीय तहसीलदार द्वारा इन आपत्तियों को दरकिनार करते हुए बिना r.r.no जांच किए इन्हें भूमि स्वामी हक प्रदान किया गया अब इन विस्थापित गांवों की भूमि पर केंद्र सरकार की कोयला मंत्रालय द्वारा कोयला उत्खनन करने भूमि दिए जाने पर इन अवैधानिक परिवार के लोगों के द्वारा भूमि राजसात होने की दर से अन्य विस्थापितों को बरगलाते हुए कंपनी को जमीन नहीं देने के लिए माहौल तैयार कर रहे हैं इन अवैधानिक तरीके से प्राप्त पट्टेधारियों कि भूमि की जांच करते हुए पट्टा निरस्त किया जाना न्यायोचित होगा।




