

धर्मजयगढ़_ रायगढ़ व कोरबा जिले के मांड एरिया में विशाल कोल भंडार को उत्खनन करने के लिए भारत सरकार द्वारा कई निजी कंपनी व सरकारी कंपनी को आबंटन किया गया है कुछ कंपनियों का काम तेजी से चल रहा है। निकट भविष्य में जल्द कुछ कोल कंपनी अपनी उत्खनन कार्य चालू कर देगा। परंतु अधिग्रहण क्षेत्र के अंतर्गत s.e.c.l को बंगाली विस्थापितों को दी गई। लगभग 2000 एकड़ भूमि अधिग्रहण करना है। जो अंतिम चरण में है। इन विस्थापितों को सरकार द्वारा दी गई भूमि को कई बाहरी बंगाली द्वारा शासकीय भूमि को अपने व परिवार का नाम पट्टा बनवा लिया है। जिसकी मुआवजा शासन को ना जाकर इन फर्जी पट्टाधारियों को मिलेगा । पुनर्वास योजना के तहत 1960 से 1980 के दशक तक रायगढ़ जिले के धर्मजयगढ़ तहसील में लगभग 642 खातेदारों को जीवन यापन करने भूमि आबंटन किया था 7 एकड़ व 5 एकड़ आबंटित किया गया था। कुछ परिवार सेटलमेंट ना होने पर भाग गए जो भगोड़ा घोषित हो गया इन भगोड़ा परिवार की रिक्त भूमि पर और विस्थापित परिवार (बांग्लादेशी) अपना कब्जा कर आर आई पटवारियों से सांठ गांठ कर अपने नाम पर पट्टा बनवा लिया है। तथा दूसरे के खसरा बी 1 में अपना व परिवार का नाम चढ़वा लिया।s.e.c.l बहुत जल्द दुर्गापुर।। कोल ब्लॉक का उत्खनन कार्य चालू करने वाले हैं। ऐसी स्थिति में भूमि का मुआवजा इन फर्जी बांग्लादेशी के नाम जाएगा जो कि उक्त भूमि का मुआवजा शासन को जाना चाहिए।s.e.c.l के अधिग्रहण क्षेत्र में ऐसे कई फर्जी पट्टाधारी है। तथा कई पट्टाधारी गलत तरीके से भूमि का डायवर्सन कर अधिक मुआवजा की लालच में निर्माण कार्य कर रखे हैं इन विस्थापितों का अधिकार अभिलेख व आर.आर (रिफ्यूजी रजिस्ट्रेशन) नंबर जांच करने पर दूध का दूध और पानी का पानी स्पष्ट हो जाएगा और शासन को होनी वाली नुकसान नहीं होगा।




