

धरमजयगढ़़। कभी-कभी एक दुर्घटना सिर्फ हादसा नहीं होती, बल्कि इंसानियत की असली पहचान भी सामने ला देती है। ऐसा ही एक दृश्य धरमजयगढ़़ के छाल थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सिथरा के पास बीती रात देखने को मिला, जब दशमेश यात्री बस अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे उतर गई और गड्ढे में जा धंसी। रात के सन्नाटे में अचानक मची अफरा-तफरी से यात्रियों के बीच भय और बेचैनी का माहौल बन गया। हालांकि इस हादसे में किसी यात्री को गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन कई यात्रियों को हल्की चोटें और घबराहट का सामना करना पड़ा।
इसी दौरान धरमजयगढ़़ पतरापारा निवासी दीपेश सारथी उर्फ रिकी सारथी अपने अन्य मित्र के साथ ऐंडू़ गांव से शादी समारोह से वापस लौट रहे थे। रात में जैसे ही उनकी नजर दुर्घटनाग्रस्त बस पर पड़ी, उन्होंने बिना देर किए मानवता का परिचय देते हुए राहत कार्य में हाथ बढ़ाया।

वहीं दीपेश सारथी और उनके मित्र ने घायल एवं परेशान यात्रियों की हरसंभव सहायता की। मेडिकल दुकान से बैंडेज, मलहम और प्राथमिक उपचार की सामग्री लाकर घायलों की मरहम-पट्टी की गई। इतना ही नहीं, यात्रियों को पानी, कोल्डड्रिंक और जूस उपलब्ध कराकर राहत पहुंचाई गई, ताकि हादसे से डरे-सहमे लोगों को कुछ संबल मिल सके।
इसी बस में पत्थलगांव, जशपुर निवासी एक महिला भी सफर कर रही थी, जो कैंसर के इलाज के लिए रायपुर जा रही थी। दुर्घटना और भयावह स्थिति के कारण वह वापस लौटने को मजबूर हो गई। ऐसे कठिन समय में दीपेश सारथी ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए महिला को अपनी कार में बैठाकर सुरक्षित धरमजयगढ़़ तक पहुंचाया और वहां से पत्थलगांव जाने वाली बस में सकुशल रवाना कराया।
इस पूरी घटना ने यह साबित कर दिया कि मानवता आज भी जिंदा है। जब सड़क हादसे में लोग अक्सर तमाशबीन बन जाते हैं, ऐसे समय में दीपेश सारथी और उनके मित्र ने मदद का हाथ बढ़ाकर समाज के सामने एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है।




